तेरे मेरे बीच की tere mere bich ki [Krishna parkar][Chhattisgarhi kavita][hindi kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][छत्तीसगढ़ी कविता][हिंदी कविता][कविता]


तेरे मेरे  बीच की ये  जो दुरी है ।
कभी कभी सोंचता हूं जरूरी है।


मै भी सोंचता हूं तुम्हे ना सोंचु ।
पर सोंचता हुं  मेरी मजबूरी है ।



तुम्हे याद करूँ ना करूँ सजदा ।
तेरी मर्जी के आगे जी हजुरी है ।


आ जाओ अब चलेंगे मिलकर ।
कहानी हमारी ,अभी अधुरी है ।



       देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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