कभी कभी सोंचता हूं जरूरी है।
मै भी सोंचता हूं तुम्हे ना सोंचु ।
पर सोंचता हुं मेरी मजबूरी है ।
तुम्हे याद करूँ ना करूँ सजदा ।
तेरी मर्जी के आगे जी हजुरी है ।
आ जाओ अब चलेंगे मिलकर ।
कहानी हमारी ,अभी अधुरी है ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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