बेमऊसम बरसात,
जस बिन दुलहा के बरात।
बादर ऊपर बादर छागे,
जस मंड़वा म डारे कनात।।
नवा दुल्हिन कस आँसू,
ढुर ढुर, ढुर ढुर ढारत हे।
किसान के तो मरना होगे,
सबो डाहर ले मारत हे।।
धान पान के चिखला उड़गे,
उरीद ओन्हारी फोकला परगे।
का रउती ले जिनगी करही,
घर बार सब खोखला परगे।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़

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