* मानव- मानव संत के बानी,
नोहे कोनो फोकट कहानी।
सत के रद्दा चले खातिर,
होम दिन अपन जिनगानी ।।
* मनखे मनखे सबो समान,
करव झन ककरो अपमान ।
एके बिधाता सबो गढ़े हे,
सबो के हावय एकेच मान।।
* हावा पानी घाम सबो,
सबला बरोबर बांटत हे।
वाह!रे कलजुगिया मनखे,
दही ल कपसा आंटत हे।।
* तोर मोर म भेदे का हे,
जंउहर तंय अंटियावत हस। साधु संत के संग छोड़ के,
लबरा के पतियावत हस।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ ।
नोहे कोनो फोकट कहानी।
सत के रद्दा चले खातिर,
होम दिन अपन जिनगानी ।।
* मनखे मनखे सबो समान,
करव झन ककरो अपमान ।
एके बिधाता सबो गढ़े हे,
सबो के हावय एकेच मान।।
* हावा पानी घाम सबो,
सबला बरोबर बांटत हे।
वाह!रे कलजुगिया मनखे,
दही ल कपसा आंटत हे।।
* तोर मोर म भेदे का हे,
जंउहर तंय अंटियावत हस। साधु संत के संग छोड़ के,
लबरा के पतियावत हस।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ ।

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