मया के नजरिया

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काबर नइ डारस टूरा, मया के नजरिया ।
का होगे जोही निच्चट ,होगेस निठुरिया।।
        *  सजे हवंव सम्हरे हवंव तोर सेती बिलवा।
                गुसियाय काबर जोही, बनेस उठमिलवा।।
                 तोर मीठ बोली बर, तरसत हंव जंहुरिया!
  काबर नइ डारस टूरा...मया के नजरिया।
  का होगे जोही..........,,,,,,,,,निठुरिया ।।
   * काम बुता म मन नइ लागे,सुरता आथे तोर।
         मया के पीरा बाढ़त रहिथे, अंतस मा मोर।।
                   "नोहर" होगे दरस तोर संझा बिहनिया!
काबर नइ डारेस टुरा..मया के नजरिया ।
का होगे जोही................,.निठुरिया ।।
*    तंय ह मोर चंदा अस, मय हंव या तोर चकोर।
       गरहन काकर लागिस ,तोला नइ करे अंजोर।।
                       जिनगी अंधियार लागे, होगे करिया!
काबर नइ डारेस टुरा..,मयाके नजरिया ।
का होगे जोही...............,,,निठुरिया ।।
*       तलफत हंव मछरी कस, पानी बिना तरिया।
        तोर बिना मोर जवानी, परत हावे परिया।।
                        ले चल रे मोला ,मया के नगरिया!
काबर नइ डारेस टुरा..मया के नजरिया ।
का होगे जोही................निठुरिया ।।
*         हाँस के गोठियाके ते,अपन मया मा फाँसे।
         जिनगी मोर भुर्री करके,ते खुल-खुल हाँसे।।
                    तैं मोला बना लेना,अपन दुलहनिया!
काबर नइ डारेस टुरा ,मया के नजरिया।
का होगे जोही निच्चट,होगेस ते निठुरिया।।
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                       नोहर आर्य
    फरदडीह(डौंडीलोहारा)जिला बालोद,

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