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छत्तीसगढ़ महतारी के ओदरा,
कहूँ डिपरा त कहूँ खोदरा।
नंदिया पहार दुध के धार,
महिमा ऐकर अपरमपार ।।
किसम किसम के जिनिस,
पोटारे हे अपन ओदरा ।
रिकिम रिकिम के उपज म,
लहरावय अपन अंचरा ।।
कहूँ हीरा कहूँ पथरा हे,
कहूँ कोइला कहूँ लोहा ।
कहूँ गीता-रमायेन त,
कहूँ कबीरा के दोहा।।
अइसन मोर दाई के कोरा,
कहूँ खोदरा कहूँ डिपरा ।
जलरंग बांध बंधाए हे,
तब कहूँ हे पानी छिपरा ।।
किसान इंहा के बड मयारू,
रिकिम रिकिम उपजावत हे।
सगरो जग पोल पास के ,
अपन मया बगरावत हे।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़

1 टिप्पणियाँ
Very interesting
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