* जइसे चाबत हे चांटी *
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हमर बबा धान मींजय,
दउँरी बेलन चलावय।
दाना-दानाअलहोर के,
सुग्घर पैंरावट बनावय।।
* हमर गंवई गाँव मे,
हम खेलन उलानबाँटी।
चुनचुनावय नहाती बेरा,
जइसे चाबत हे चाँटी ।।
बियारा म पैरांवट लागे,
संउहत घात पाहाड़।
साल भरके चारा बनय,
गाय गरुवा अउ बिजाड़।।
कहाँ पाबे धान अब तो,
खेते के खेते मिंजावत हे।
थेसर, हरवेस्टर के मारे,
पैरा तको बस्सावत हे।।
सुंघय नहीं गाय-गरुवा,
खेते डहर जरावत हे।
बाताबरन,खराप करके,
अपने मउंत बलावत हे।।
गाय-गरुवा राखय नहीं,
कुकुर ल घर म बाँधत हे।
गऊ माता बर चारा नइहे,
कुकुर बर मांस रांधत हे।।
का जनी दिनो-दिन,
मनखे मति छरियावत हे।
एक्केच पउवा चढ़े ले,
थोरहे के बंहुते नरियावत हे।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद ,छत्तीसगढ़।


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