दिल झुम जाए किसी तराने से ।।
फिर मतलब ही नहीं जमाने से ।।
गीत तुझपे लिखकर बैठा हूं मै ।।
मगर डरता हूँ क्यूं गुनगुनाने से ।।
एक -एक कर दिन गुजरते रहे ।।
कोई मुकरता रहा मुस्कुराने से ।।
कोई सागर मिले तो डुब जाऊं ।।
ये दिल भरता नहीं मयखाने से ।।
वफा की चाहत मै रखते रखते ।।
मै थक सा गया दिल लगाने से ।।
फिर इस जहाँ मे बहार आएगी ।।
ऐसा होगा , तुम्हारे आ जाने से ।।
**कृष्णा पारकर**

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