मुड़ मुड़ के देखना तोर आदत

मुड़ मुड़ के देखना तोर आदत हे का ।
या मया पिरित के तोला चाहत हे का ।

तै अपने-अपन कसमसावत रहिथस ।
दुनिया से तोला कुछ सिकायत हे का ।

अगर मोर संग मया हे तो आके बोल ।
अब तोला मोर सुरता सतावत हे का ।

बइहां मा आके, मन भर के प्यांर कर ।
अइसे दुरिहा ले प्यास बुझावत हे का ।

पहिली तो मोला तै अइसे नइ निहारे ।
अब मया के पीरा हर जनावत हे का ।

मोर खातिर सब ला बईरी बना डारे ।
संगी-सहेली तोला नइ भावत हे का ।

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