शादी के लड्डू (तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा)

*सार छंद मे एक अदना प्रयास*

*शादी के लड्डू*

शादी में हैं बजते बाजे,झूमें नाचे सारे।
सपनों की रानी है अपनी,जो निहारती द्वारे।। 
फूटे मन शादी के लड्डू,दिन ये ऐसा आया।
जाऊंगा चढ़कर मैं घोड़ी,दिल में उमंग छाया।।

रह रह वो पुकारती होगी,आ जा दुल्हे राजा।
तरस गयी है अँखिया मेरी,ज्यादा मत तरसाजा।।
दिल मेरा हिचखोले खाये,इकपल रहा न जाये।
लेकर क्यूँ बेचैनी दिल ये,पलपल मचला जाये।।

जल्दी फेरे तुम लगवाओ,बाजा ढोल बजाओ।
शादी की शहनाई गुंजी,सेहरा माथ सजाओ।।
आओ मेरे सारे भाई,घड़ी बड़ी शुभ है आई।
तोषन देता आकर बन्दे,लाखा कोटि बधाई।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

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