* भांठा मटासी डोरसा कन्हार *
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घर-दुवार खेत -खार ,
बारी-बखरी जंगल-पहार।
मया-दुलार साज- सिंगार ,
धरम-करम तीज-तिहार ।।
हमर गंवई गाँव के,
महिमा हे अपरमपार ।
भांठा- मटासी डोरसा-कन्हार,
सबो उपज के हे भरमार ।।
धनहा -डोली गुरतुर- बोली,
नता- रिस्ता हाँसी- ठिठोली ।
मीत-मितानी गंगा-पानी,
नर-नारी राजा -रानी ।
ओरी-ओर खेतिहारिन रेंगना,
नंदिया भीतर के जलहर टेंगना।।
गौरा -गौरी सुवा-ददरिया,
छानी-परवा छाए खदरिया।।
मुड़ मे पागा कान में चोंगी,
नदिया-नरवा टूटहा डोंगी।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़
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घर-दुवार खेत -खार ,
बारी-बखरी जंगल-पहार।
मया-दुलार साज- सिंगार ,
धरम-करम तीज-तिहार ।।
हमर गंवई गाँव के,
महिमा हे अपरमपार ।
भांठा- मटासी डोरसा-कन्हार,
सबो उपज के हे भरमार ।।
धनहा -डोली गुरतुर- बोली,
नता- रिस्ता हाँसी- ठिठोली ।
मीत-मितानी गंगा-पानी,
नर-नारी राजा -रानी ।
ओरी-ओर खेतिहारिन रेंगना,
नंदिया भीतर के जलहर टेंगना।।
गौरा -गौरी सुवा-ददरिया,
छानी-परवा छाए खदरिया।।
मुड़ मे पागा कान में चोंगी,
नदिया-नरवा टूटहा डोंगी।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़

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