*आवत नवा साल भइया *
______*****_____
आवत नवा साल म,
जम्मो ल जोहार हे।
अवइया ल मानव,
बीते सब बेकार हे।।
* जवइया के बिदा,
अवइया के मान हे ।
नवा सुरूज आही कथें,
सुत-उठ के परनाम हे।।
* सूरज चंदा विहिच हरे ।
का जनी काकर भूत धरे।
जीना खुदे ल रहिथे,
मनखे अपने अपन मरे ।।
* आगे नवा बिहान संगी,
नवा सुरूज उगइया हे।
पाछू के जम्मो अंधियारी,
जरमुड़ ले तोपइया हे।।
जावत के बिदा करव,
अवइया के सुवागत हे ।
भुल-चुक ल पाछू टारव,
कुछ नवा के जुगारत हे।।
'मांनव'तुम झन मानव,
मानव ले होथे गलती ।
पीछू लहूट के देख झन,
ठाड़ झन होबे चलती।।
सुख -दुख तो संगी जिनगी के,
काला पाये का गंवाबे ।
जउन करम करबे भैया,
विहिच फल तंय पाबे।।
विहिच फल तंय पाबे।।
________*******_______
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़।
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आवत नवा साल म,
जम्मो ल जोहार हे।
अवइया ल मानव,
बीते सब बेकार हे।।
* जवइया के बिदा,
अवइया के मान हे ।
नवा सुरूज आही कथें,
सुत-उठ के परनाम हे।।
* सूरज चंदा विहिच हरे ।
का जनी काकर भूत धरे।
जीना खुदे ल रहिथे,
मनखे अपने अपन मरे ।।
* आगे नवा बिहान संगी,
नवा सुरूज उगइया हे।
पाछू के जम्मो अंधियारी,
जरमुड़ ले तोपइया हे।।
जावत के बिदा करव,
अवइया के सुवागत हे ।
भुल-चुक ल पाछू टारव,
कुछ नवा के जुगारत हे।।
'मांनव'तुम झन मानव,
मानव ले होथे गलती ।
पीछू लहूट के देख झन,
ठाड़ झन होबे चलती।।
सुख -दुख तो संगी जिनगी के,
काला पाये का गंवाबे ।
जउन करम करबे भैया,
विहिच फल तंय पाबे।।
विहिच फल तंय पाबे।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़।

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