छत्तीसगढ़ के गबरू जवान,
दहाड़िस वो घाटी गलवान।
भारत देश के रक्षा खातिर,
कर दिस हे प्राण बलिदान ।।
छल कपट के चीनी चाल,
तोरो होही बारा हाल।
कब तक बजाबे लबरा गाल,
नइ चले अब ड्रेगन चाल ।।
भोरहा छोड़ दे बैंसठ के,
भारत अब भारी होगे ।
तोर छाती म मुंग दरबो,
तोर बिमुख दुनिया सारी होगे।।
चीन चिन्हाबे घलो नहीं,
हो जबे निच्चट छिन भिन्न।
जादा अतलंग झन कर बेटा,
अब अपन बाँचे के दिन गिन।।
सत अहिंसा के भूंइया म,
शेखी जादा झन बघार ।
सिधवा कब शेर हो जाही,
हो जही तोर बेड़ा पार।।
___________****___________
नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
दहाड़िस वो घाटी गलवान।
भारत देश के रक्षा खातिर,
कर दिस हे प्राण बलिदान ।।
छल कपट के चीनी चाल,
तोरो होही बारा हाल।
कब तक बजाबे लबरा गाल,
नइ चले अब ड्रेगन चाल ।।
भोरहा छोड़ दे बैंसठ के,
भारत अब भारी होगे ।
तोर छाती म मुंग दरबो,
तोर बिमुख दुनिया सारी होगे।।
चीन चिन्हाबे घलो नहीं,
हो जबे निच्चट छिन भिन्न।
जादा अतलंग झन कर बेटा,
अब अपन बाँचे के दिन गिन।।
सत अहिंसा के भूंइया म,
शेखी जादा झन बघार ।
सिधवा कब शेर हो जाही,
हो जही तोर बेड़ा पार।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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