गिरे तै नजर ले, मोर आंखी के पानी होगए ।
कल तै मोर जान रहे , आज फलानी होगए ।

तोर नांव अउ तोर गांव मोला दुन्नो तड़पाथे ।
कईसे तोला भुलावं, तै अमर कहानी होगए ।

अपन रानी बना के , मै बसाए रहेंव मन मा ।
लेकिन" तै तो कोनो दुसर के दिवानी होगए ।

गरीब के मया हर, तोला चिटको नई भाईस ।
रूपिया-पईसा के मस्ती मा, मस्तानी होगए ।

तो फिर ठीक हे दुश्मनी करबे ईमानदारी से ।
गोरी मोर बर तै आज से पाकिस्तानी होगए ।

              **कृष्णा पारकर**

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