बेटी दिवस की बहुत बहुत शुभकामना और बधाई के संग एक रचना सादर समीक्षार्थ
बेटी ल सूरुज बनावव...
करत हवँव गोहार मँय,
नवा अँजोर बगरावव।
चंदा उइथे रातकून,
बेटी ल सूरुज बनावव।
एक कुल बेटा सम्हाले,
बेटी दूकुल सँवारत हे।
बनके दाई इही बेटी,
ममता अपन लुटावत हे।
परिवार रुप ये बगिया म,
फूल सही ममहावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।१।
पढ़ही लिखही इसकुल म,
नाँव देश के करही।
दाई ददा गाँव समाज के,
मान एकर ले बढ़ही।
देवारी के दीया बनाके,
घर अंगना सजावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।२।
चिरई बन चहकन दव,
ए खुला आसमान म।
बेटी ल घलो सिखावव,
कइसे जिथे जहान म।
उड़त रहय चारो मुड़ा,
अइसन पतंग बनावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।३।
कोख प पलत बेटी ल,
ये दुनिया आन दव।
करन देवव सपना पूरा,
संगी हो पहिचान दव।
बेटा-बेटी के भेदभाव,
मन ले दूरिहा भगावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।४।
तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"
सरपंच ग्राम पंचायत धनगाँव
डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

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