विषय -रक्तदान, थैलेसीमिया बच्चों को जीवनदान.
रक्तदान: महादान [विधाता छंद-तोषण कुमार चुरेन्द्र ]
किया जो दान जीवन का, वही इंसान होता है।
लहू की बूंद देकर ही, बड़ा सम्मान होता है।
दुआएँ ले गरीबों की, विधाता खुश यहाँ होगा,
बचा ले जान जो सबकी, वही भगवान होता है।
न पूछो जाति मजहब को, लहू का रंग है लाली।
बचा लो डूबती कश्ती, न जाए हाथ यह खाली।
जलाओ दीप आशा के, किसी के घर अँधेरा हो,
खिलेगी फिर बहारें भी, सजेगी स्वप्न की डाली।
नसों में दौड़ता जो है, उसे बेकार मत समझो।
किसी लाचार के खातिर, उसे उपहार तुम समझो।
गिरा जो वक्त का मारा, सहारा तुम उसे देना,
मनुजता की इबादत को, सदा ही सार तुम समझो।
डरो मत दान करने से, बढ़ेगी शक्ति ही तन में ।
निकल कर आओ तुम आगे, रखो विश्वास को मन में।
मिलेगा चैन रूह को, सुकूँ की नींद आएगी,
महक उपकार की होगी, महकती रूह के वन में।
बना है रक्त का रिश्ता, जगत में प्रेम का नाता।
लिखेगा पुण्य का लेखा, स्वयं ही भाग्य विधाता।
दिया जो आज औरों को, वही कल साथ आएगा,
भलाई जो यहाँ करता, अमर है नाम रह जाता।
तोषण ‘चुरेन्द्र दिनकर’ धनगांव डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
मोबाइल 9575070689/6267538036
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