* घरो घर लगे हे तारा *
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गंवई गांव ह सून्ना लागे,
गली खोर अउ पारा।
फदके कातिक चिलचिल बूता,
घरो घर लगे हे तारा।।
*बड़े बिहनिया सुत उठके,
भउजी ह भारा डोहारय।
काम बूता बियापय नहीं,
मुच मुच मुस्की ढारय।।
सालभर के कमई सकेले.......जेन मुहूँ के काँवरा!
गंवई गांव ह.....................गली खोर अउ पारा!!
फदके कातिक.................घरो घर लगे हे तारा!!!
* बासी पेज सब खेते डहर हे,
थोरकुन छांव म सुरतावय।
आज के बासी काली के साग,
खाके जीव ल जुड़ावय।।
भूख म सबो मिठाथे.........अलोना होवय के खारा!
गंवई गांव ह.......................गली खोर अउ पारा!!
फदके कातिक...................घरो घर लगे हे तारा!!!
* गऊ बरोबर सिधवा होथें,
अपन काम बूता ले काम हे।
जुरमिल के सब संग रहिथें,
अपन गांव म चारो घाम हे।।
छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया......आवय हमर एके नारा!
गंवई गांव ह...........................गली खोर अउ पारा!!
फदके कातिक................ ..... घरो घर लगे हे तारा!!!
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नोहर आर्य,
फरदडीह,(डौंडीलोहारा) जिला बालोद,छ.ग।

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